यथार्थ !

मेले में, दुनियाँ के, घूमने आए हैं, अपनी गाड़ी से ? अच्छी बात है, आपका हार्दिक स्वागत🙏

यह महत्वपूर्ण है कि आपकी गाड़ी, बनी रहे, सही सलामत, इसके लिए आपका, सही ही होना, ना तो जरूरी है, ना काफी। सही-गलत, यूँ तो, व्यक्तिगत, आकलन होते हैं, तो मेरा आशय है, नियमानुकूल, विधि-सम्मत। चाहें तो गाड़ी गैराज में, बन्द रख सकते हैं, मगर फिर गाड़ी का मतलब, भला क्या ?

कीमत है, तो सामन्जस्य की, जैसे और सब गाड़ियाँ, चल रही हों, जिधर किधर चल रही हों, जिस गति से चल रही हों, चल रही हों, रुक-रुक कर, चल रही हों, या कि खड़ी हो गई हों। अन्यथा, आपकी अपनी गाड़ी की सलामती की गारंटी कोनी, हुआ करें, आप सही, 24 टका ! आप, स्वयं का ही तो, सही साइड पर रहना, सुनिश्चित कर सकते हैं, सामने वाले का क्या ? और ठुकी तो नुकसान तय, गलती हो, या ना हो ! और फिर लोकतंत्र है, उसका सही-गलत, आपके से, कम कोनी। 

फिर एकाएक, आपका ध्यान गया कि गाड़ी तो आपकी, है ही नहीं, कभी थी भी नहीं, कि आप, गाड़ी साथ नहीं लाए थे। साथ ले कर, जायेंगे भी नहीं, ले जा ही नहीं सकते। यहीं छोड़कर जायेंगे, या तो किसी को देकर जायें। प्रभु की यही लीला है, मारामारी, भगवान ही जाने, काहे की ? 🤗

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