असार, ही भड़भड़ा रहा है, मेरे दोस्त ! ये सुख का, खुशियों का, संतोष का दरवाजा, अन्दर की तरफ़, तेरे ही अन्दर की तरफ खुलता है। बाहर तो है, कुछ भी नहीं !
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THE QUEUE....
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